जमपुर दरबार सज्यौ है,
करमां रौ लेखौ लेवण नैं।
तीन छंटैल आय खड़या,
म्यानौ आप-आपरौ देवण नैं।।
कैह जमरापुर अठै साचली सरकार,
कूड़-कपट अठै चालै कोनी।
नीं चलै अठै कोई साम-दाम,
म्हारै सूं उंची कोट-कचैड़ी कोनी।।
तीनूं छंटैल दे मूंछया मरोड़,
अेके साथै फुंफकार करी।
म्है इण धरणी रा पूजनीक,
म्हानैं बुलावण री हिम्मत कींकर करी।।
मंतरी-संतरी भरै म्हारी हाजरी,
कलैक्टर, एस. पी. म्हानैं निवण करै।
भणैतर जस रा आखर भणै म्हारा,
कवि-कलमकार बिड़द बखाण करै।।
तांबा-पतरी लिख्या सज्या,
सगळा वांरी साख भरै।
देस-दुनिया देखण रौ पट्टो म्हारै,
अे ठाट-बाट थारै क्यूं अखरै।।
राजसी संनमान सूं उठी अरथी म्हारी,
अणगिणिया पुसब-चक्र चढया म्हारै।
इक्कीस तोपां री सलामी देय,
सगळी नगरी जै-जैकार करै।।
अखबार मीडीया सगळा तरसै,
छेकड़ला चितराम लेवण नैं।
नेता-अफसर बाट जोवै,
दरस छेकटड़ला पावण नैं।।
म्हारै इण महा जातरा दरसाव सूं,
घर वाळा घणा हरख रैया है।
ओ राजसी संनमान देख-देख,
चमगूंगा सा व्है रैया है।।
चालता चितराम ज्यूं सैमूंडै देख-देख,
निजरा पण धोखो खावै ही।
औ बूढल्यौ इयां जासी,
आ सोच-सोच भंवळा आवै ही।।
म्है तीनूं निबीयै सूं पैली जलम्यौड़ा,
दंात औजूं खिरीया कोनी।
रजपूती राज सूं लड़या-भिड़या,
आजादी लावण में कसर राखी कोनी।।
इतरौ सुण जमराजा जोर सूं हाकल करी,
थै तीनूं म्हारै सूं नीं छाना।
थारी इसीजी रपटां पाखती पड़ी,
थै बोलो कै म्हैं खोलूं इसीजी रा पांना।।
थै तीनूं हो करमहीण आ सांपड़ते दीसै,
कूड़-कपट री धजा फरूकावौ।
फोकट री खाय-खाय हाड-हराम बण्या,
अबै उंचौ आसण किण बिध पावौ।।
जै चावौ थै जुगती-मुगती,
कपट गांठ खोलणी पड़सी।
साची-साची बोल बतळावो,
नींतर लख चौरासी भोगणी पड़सी।।
हाको हाक होड मची तीनां में,
पैली म्है, पैली री रट लगावै हा।
अेक दूजै री खोलण पोल,
बूकिया उंचा चढावै हा।।
साईना हा तीनूं छंटैल पण,
केई दिनां-महीनां री छेती ही।
चतरो, पेमो उदो आ बारी जचावै हा,
पैली गुळ गांठ चतरे खोलण री चेती ही।।
चतरो बोल्यो- सुणो महाराज,
म्हैं तो ठैरयौ 14 बरस रौ जाबक टाबर।
जांघियै रौ नाड़ौ इज नीं बंधतो हो,
आजादी किसीक व्है नीं जाणै ओ टाबर।।
कुण लगाई तुगी म्हारै ठा कोनी,
झंडै रै उंधे-मूंधे रौ नीं हो ज्ञान कोई।
हाके-हुक्के रै बिचाळै चाणचक भाज पड़यौ,
पुलिस पकड़यौ जद म्हारै लारै नीं हो कोई।।
पुलिस पकड़यो अर जंतरायौ,
दो दिन पछै छोड छिटकायौ।
केई नेता म्हनैं घणौ बिलमायौ,
नूंवी आजादी रौ पाठ पढायौ।।
अबे हिवड़ै में मन रा लाडू फूटै हा,
जेळ-कचैड़ी घर सा लाग्या।
नूंवी चढी जवानी हेला मारै ही,
म्हारै सांमी सगळा म्हनै ओछा लाग्या।।
इण जोस में अक्कड़ घेरा घालै ही,
चक्कू-छूरा ले म्हैं बाणिया नैं धमकांतो।
पईसा-टक्का लूंट म्हैं मौज उडातो,
हाकां कर-कर म्हैं उत्पात घणी मचांतो।।
म्हारी आ उत्पात लोगां नैं घणी अणखावै ही,
आखता बाणिया थाणै में रपट लिखांता हा।
थाणे अर जेळ सूं म्हारौ नातौ जुड़ग्यौ,
अे सगळा रळ-मिल म्हनै कुटांता हा।।
जेळ सूं इण नातै बिचाळै देस आजाद हुयग्यौ,
अे सगळा मुकदमा आजादी रै खाते में भिळग्या।
म्हनैं मिलग्या तांबा-पतर म्हैं पूजनीक बणग्यौ,
म्हारा साथीड़ा रा मुकदमा भी इण भेळै भिळग्या।।
महाराज ओ साच आज थांरै सांमी परगाास्यौ है,
लोगा म्हनैं माथै बैठायौ म्हारौ कसूर कांई।
म्हनैं लोगां धिंगााणै थुल्डयौ बिड़द बंचाई,
राज रौ माल रूच-रूच खायो तो थांरो कांई।।
अबै पेमो अर उदो भी गांठा खोलण लाग्या,
दोवूं अेके साथै बोल पड़या।
चतरै कैयी जिकी बातां अेकदम खरी है,
इण रै जोस साथै म्हैं भी चाल पड़या।।
म्है भी इण रै साथै हाको-हाक मचाई ही,
रबड़ी, रसमळाई सागै बैठ नैं खाई ही।
अेकर जेळ री हवा खाई,
इण पछै म्हारी भी साख बधी सवाई ही।।
जमराज बोल्या- थांरै इण साच सूं म्हैं राजी हूं,
पण म्हनैं फरज म्हारौ निभाणौ पड़सी।
थै साठ बरस पूजीज्या इण धरणी पर,
अबै फिटकार म्हारली झेलणी पड़सी।।
विनोद सारस्वत,
बीकानेर।
रविवार, 10 अक्टूबर 2010
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